वो लड़की जो ज़िंदा थी… लेकिन जी नहीं रही थी
कभी-कभी इंसान मरता नहीं है… बस अंदर से खत्म हो जाता है।
रिया भी ऐसी ही थी। वो जिंदा थी… सांस ले रही थी… लोगों से बात भी करती थी… लेकिन असल में वो कहीं अंदर से बहुत पहले मर चुकी थी।
उसका बचपन बहुत साधारण था, लेकिन खुश नहीं था। घर में हर दिन शोर होता था — लड़ाई, गुस्सा, और चुप्पी।
रिया छोटी थी, लेकिन उसने जल्दी समझ लिया था कि इस घर में उसकी खुशी किसी के लिए मायने नहीं रखती।
वो रोती थी… लेकिन चुपचाप। ताकि किसी को पता न चले।
धीरे-धीरे उसने अपने अंदर एक दुनिया बना ली — जहाँ वो अकेली रहती थी।
रात उसका सच थी।
जब सब सो जाते थे, तब उसका दर्द जागता था।
वो खिड़की के पास बैठकर बाहर अंधेरे को देखती रहती… जैसे वो अंधेरा उसके अंदर उतर गया हो।
कई बार उसने खुद से पूछा — “मैं इतनी खाली क्यों हूँ?”
उसे कभी जवाब नहीं मिला।
एक दिन उसकी जिंदगी में कोई आया… जिसने उसे महसूस कराया कि वो भी किसी के लिए खास हो सकती है।
रिया ने पहली बार खुद को खुलने दिया। वो हँसी… खुलकर हँसी।
उसे लगा कि अब उसकी जिंदगी बदल जाएगी।
लेकिन जिंदगी इतनी आसान नहीं थी।
जिस इंसान ने उसे उम्मीद दी थी, वही एक दिन उसे छोड़कर चला गया।
ना कोई वजह… ना कोई अलविदा।
बस एक खालीपन… जो पहले से भी ज्यादा गहरा था।
उस दिन रिया ने रोना बंद कर दिया।
क्योंकि अब उसके पास आँसू भी नहीं बचे थे।
उसने आईने में खुद को देखा और कहा — “अब मैं किसी पर भरोसा नहीं करूँगी…”
समय बीतता गया।
लोग उसे देखते और कहते — “तू ठीक लग रही है…”
वो बस मुस्कुरा देती।
लेकिन सच ये था कि वो अब कुछ महसूस ही नहीं करती थी।
ना खुशी… ना दुख… बस एक अजीब सी खामोशी।
वो लोगों के बीच रहती थी, लेकिन पूरी तरह अकेली थी।
एक दिन उसने अपनी डायरी में लिखा — “मैं जी रही हूँ… लेकिन पता नहीं क्यों…”
और यही उसकी जिंदगी की सच्चाई थी।
कुछ लोग ऐसे होते हैं… जो कभी ठीक नहीं होते।
बस… जीते रहते हैं।