विकलांग गरीब लड़का जो कलेक्टर बना रंजीत की कहानी
बिहार के एक छोटे से गाँव में रंजीत नाम का एक लड़का रहता था। रंजीत बचपन से ही शारीरिक रूप से विकलांग था। उसका एक पैर ठीक से काम नहीं करता था, जिसकी वजह से उसे चलने में बहुत परेशानी होती थी।
रंजीत का परिवार बहुत गरीब था। उसके पिता खेतों में मजदूरी करते थे और उसकी माँ घरों में काम करके किसी तरह घर चलाती थी। कई बार घर में इतना पैसा भी नहीं होता था कि रंजीत के लिए किताबें खरीदी जा सकें।
लेकिन रंजीत का सपना बहुत बड़ा था। वह हमेशा कहता था — “एक दिन मैं बड़ा अधिकारी बनूंगा और अपने गाँव की गरीबी खत्म करूँगा।”
रंजीत रोज कई किलोमीटर लंगड़ाते हुए स्कूल जाता था। कभी बारिश होती, कभी तेज धूप, लेकिन उसने पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी।
गाँव के कुछ लोग उसका मजाक उड़ाते थे। वे कहते थे — “तुम जैसे लड़के से कुछ नहीं होगा।”
लेकिन रंजीत हमेशा मुस्कुराकर जवाब देता — “एक दिन मैं सबको दिखाऊँगा कि मेहनत क्या होती है।”
रंजीत रात में लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करता था। कई बार बिजली भी नहीं होती थी, फिर भी वह हार नहीं मानता था।
स्कूल खत्म होने के बाद रंजीत ने शहर जाकर पढ़ाई करने का फैसला किया। पैसे की बहुत कमी थी, इसलिए वह दिन में छोटे-छोटे काम करता और रात में पढ़ाई करता।
कई सालों की कठिन मेहनत के बाद रंजीत ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा पास कर ली। अब वह जिले का कलेक्टर बन गया था।
जब रंजीत कलेक्टर बनकर अपने गाँव लौटा, तो पूरे गाँव के लोग उसे देखकर हैरान रह गए। जो लोग कभी उसका मजाक उड़ाते थे, आज वही लोग उसकी तारीफ कर रहे थे।
रंजीत ने गाँव में स्कूल, सड़क और अस्पताल बनवाया। उसने कहा — “गरीबी और कमजोरी कभी इंसान की किस्मत तय नहीं करती, मेहनत और हिम्मत ही असली ताकत होती है।”
आज भी बिहार के उस गाँव में लोग बच्चों को रंजीत की कहानी सुनाते हैं। वे कहते हैं — अगर इरादा मजबूत हो, तो एक विकलांग गरीब लड़का भी कलेक्टर बन सकता है।