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बिहार का किसान रामलाल की सच्ची कहानी

Ayesha 18 Mar, 2026 99 Views
बिहार का किसान खेत में काम करता हुआ

बिहार के सिवान जिले के एक छोटे से गाँव में रामलाल नाम का एक किसान रहता था। गाँव बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन वहाँ के लोग मेहनती थे। रामलाल के पास ज्यादा जमीन नहीं थी, बस करीब दो बीघा खेत था। लेकिन उसी खेत पर उसका पूरा परिवार निर्भर था।

रामलाल की सुबह बाकी लोगों से बहुत पहले शुरू होती थी। जब गाँव के ज़्यादातर लोग सो रहे होते थे, तब वह उठकर हाथ-मुँह धोता, चाय पीता और बैलों को लेकर खेत की तरफ निकल जाता।

खेत में काम करना आसान नहीं होता। कभी धूप इतनी तेज होती कि जमीन से आग निकलती महसूस होती, कभी बारिश इतनी होती कि खेत में खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता। लेकिन रामलाल ने कभी मेहनत से पीछे हटना नहीं सीखा।

उसके पिता भी किसान थे और उन्होंने बचपन से उसे यही सिखाया था — “किसान का पसीना कभी बेकार नहीं जाता।” यह बात रामलाल के दिल में बैठ गई थी।

घर की हालत बहुत अच्छी नहीं थी। कभी-कभी ऐसा भी होता था कि फसल खराब हो जाए तो पूरे साल पैसों की परेशानी बनी रहती थी। लेकिन फिर भी रामलाल ने अपने बच्चों की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी।

गाँव में कई लोग शहर जाकर काम करने लगे थे। वे रामलाल से भी कहते — “शहर चलो, वहाँ ज्यादा पैसा मिलेगा।” लेकिन रामलाल हमेशा हँसकर कहता — “हम किसान हैं, खेत ही हमारी पहचान है।”

सूखे खेत में परेशान किसान

एक साल ऐसा आया जिसने पूरे गाँव को हिला दिया। बरसात समय पर नहीं हुई और धीरे-धीरे खेत सूखने लगे। धान की फसल जो किसानों की सबसे बड़ी उम्मीद होती है, वह लगभग बर्बाद हो गई।

रामलाल रोज सुबह खेत जाता और सूखी मिट्टी को देखकर चुपचाप बैठ जाता। उसकी आँखों में चिंता साफ दिखाई देती थी। उसे पता था कि अगर इस साल फसल नहीं हुई तो घर चलाना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

गाँव के कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी। अब वे सब परेशान थे। कुछ लोग तो खेती छोड़ने की भी सोचने लगे थे।

रामलाल भी अंदर से बहुत टूट गया था, लेकिन उसने हार मानने से इनकार कर दिया। उसने सोचा कि अगर वही तरीका अपनाता रहा तो हर साल यही परेशानी होगी।

तभी उसने एक नया फैसला लिया। उसने अपने खेत के एक हिस्से में सब्ज़ियाँ लगाने की योजना बनाई। टमाटर, बैंगन और मिर्च की खेती शुरू की।

शुरू में गाँव के कई लोग हँसने लगे। वे कहते — “धान की जगह सब्ज़ी? यह क्या करेगा?”

लेकिन रामलाल ने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया। वह हर दिन मेहनत करता रहा। धीरे-धीरे पौधे बड़े होने लगे और खेत हरा दिखने लगा।

अच्छी फसल के साथ खुश किसान

कुछ महीनों बाद वही खेत सब्ज़ियों से भर गया। टमाटर लाल हो चुके थे, मिर्च हरी-हरी चमक रही थी और बैंगन की फसल भी अच्छी थी।

रामलाल सुबह-सुबह सब्ज़ियाँ तोड़कर बाजार ले जाता। पहले ही दिन उसे उम्मीद से ज्यादा पैसे मिले। धीरे-धीरे उसकी कमाई बढ़ने लगी।

अब गाँव के वही लोग जो पहले उसका मजाक उड़ाते थे, उसके पास सलाह लेने आने लगे। वे पूछते — “रामलाल, यह सब कैसे किया?”

रामलाल हमेशा एक ही बात कहता — “किसान अगर मेहनत के साथ थोड़ा नया सोच ले तो खेत सोना उगल सकता है।”

कुछ सालों में उसकी हालत पहले से बेहतर हो गई। उसने अपने घर की मरम्मत करवाई और अपने बेटे को कॉलेज भेजा।

शाम के समय जब वह खेत के किनारे बैठकर डूबते सूरज को देखता था, तो उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान होती थी।

वह अक्सर धीरे से कहता — “किसान की जिंदगी कठिन जरूर होती है, लेकिन मेहनत करने वाला किसान कभी हारता नहीं।”

लेखक: Ayesha
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