4 किलो का सच – डिहटोल, अमही पंचायत ,मधुबनी, बिहार
बिहार के मधुबनी जिले के एक छोटे से गाँव डिहटोल (अमही पंचायत)में… हर महीने एक ही दिन सबको इंतज़ार रहता था — राशन मिलने का दिन।
“आज मिल जाएगा पूरा 5 किलो…” रामू लाइन में खड़ा अपने दोस्त से बोला।
लेकिन पास में खड़े बुजुर्ग हँस पड़े — “5 किलो? यहाँ कभी किसी को पूरा मिला है क्या?”
राशन की दुकान पर भीड़ थी… सब गरीब लोग… सबको अपने हिस्से का अनाज चाहिए था।
डीलर ( जीवछ पासवान) अंदर बैठा था… चेहरे पर घमंड साफ दिख रहा था।
“अगला आओ!” उसने जोर से आवाज लगाई।
रामू अपनी बारी पर आगे बढ़ा।
“नाम?” डीलर ने पूछा।
“रामू यादव…”
डीलर ने बोरी उठाई… और तौलने लगा।
रामू ध्यान से देख रहा था…
“भइया, ये तो 4 किलो लग रहा है…”
डीलर गुस्से में बोला — “तू मुझे सिखाएगा? जितना मिल रहा है, ले ले…”
रामू चुप हो गया…
उसे पता था — यहाँ हर महीने 5 किलो में से 1 किलो काट लिया जाता है।
और जो 4 किलो मिलता है… उसमें भी तराजू से खेल होता है।
“कुछ बोलोगे तो अगली बार राशन बंद…” डीलर ने धीरे से धमकी दी।
गाँव के लोग सब जानते थे…
लेकिन कोई कुछ बोलता नहीं था।
“कंप्लेंट कर दो…” एक बार किसी ने कहा था।
लेकिन जवाब आया — “किससे? सब मिले हुए हैं…”
धीरे-धीरे ये बेईमानी आदत बन गई।
हर महीने… हर गरीब का 1 किलो अनाज गायब हो जाता।
और सालों से यही चल रहा था।
एक दिन… रामू ने अपने बेटे को देखा… जो भूखा सो गया था।
उसकी आँखों में आँसू आ गए।
“हम गरीब हैं… इसलिए हमारा हक भी छीन लिया जाएगा क्या?”
उसने धीरे से कहा।
उस दिन पहली बार… उसके दिल में डर से ज्यादा गुस्सा था।
शायद… अब कुछ बदलने वाला था ?....
यह सच्ची कहानी है, अभी तक ऐसा ही चल रहा है| Name of dealer :-जीवछ पासवान