उसने कहा था… मैं इंतज़ार करूँगी
“अगर मैं दूर चला जाऊँ तो… तुम भूल जाओगी मुझे?” अमन ने धीरे से पूछा।
सना ने बिना सोचे जवाब दिया — “नहीं… मैं इंतज़ार करूँगी…”
अमन ने मुस्कुराकर कहा — “आजकल कौन करता है इंतज़ार…?”
सना ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा — “जो सच्चा प्यार करता है… वही करता है…”
दोनों के बीच कोई वादे नहीं थे… ना रोज मिलना… ना छुप-छुपकर बातें करना…
बस एक भरोसा था — जो दूरी से भी टूट नहीं रहा था।
समय बीतता गया…
अमन काम के लिए शहर चला गया।
फोन कम होने लगे… बातें कम होने लगीं…
लेकिन सना का इंतज़ार कम नहीं हुआ।
हर रात वो फोन देखती…
“शायद आज कॉल आए…”
लेकिन कई रातें ऐसे ही गुजर गईं।
एक दिन उसकी सहेली ने कहा — “तू पागल है… वो तुझे भूल चुका है…”
सना ने मुस्कुराकर कहा — “सच्चा प्यार भूलने के लिए नहीं होता…”
एक दिन… अमन अचानक वापस आया।
वो दूर खड़ा था… और सना को देख रहा था।
सना अब भी वही थी… वही सादगी… वही इंतज़ार…
अमन की आँखों में आँसू आ गए।
“तुमने सच में इंतज़ार किया…?”
सना मुस्कुराई — “मैंने कहा था ना…”
अमन ने धीरे से कहा — “आज समझ आया… सच्चा प्यार मिलना मुश्किल क्यों होता है…”
“क्योंकि हर कोई इंतज़ार नहीं कर सकता…”