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जिसे उड़ना सिखाया… वही छोड़ गई

Ayesha 27 Mar, 2026 33 Views
बाप बेटी को पढ़ाता हुआ

“बेटी… तू बस पढ़ाई कर… मैं सब संभाल लूँगा…”

रामलाल ने अपनी छोटी सी बेटी पूजा से कहा।

गरीब था… लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे।

“मुझे बड़ा आदमी बनना है पापा…” पूजा मुस्कुराते हुए कहती।

रामलाल हँस देता —

“तू नहीं… तू तो बड़ा इंसान बनेगी…”

दिन में मजदूरी… रात में बेटी की पढ़ाई…

रामलाल ने अपनी पूरी जिंदगी उसकी किताबों में लगा दी।

कई बार खुद भूखा सो गया…

लेकिन बेटी की फीस कभी नहीं रुकी।

बेटी पढ़ाई करके सफल होती हुई

साल गुजरते गए…

पूजा पढ़-लिखकर बड़ी हो गई…

और एक दिन…

उसने वो हासिल कर लिया…

जिसका सपना उसके बाप ने देखा था।

“पापा… मैं अफसर बन गई…”

रामलाल की आँखों से आँसू निकल पड़े —

“आज… मेरी मेहनत रंग लाई…”

गाँव में लोग कहने लगे —

“देखो… मजदूर की बेटी अफसर बन गई…”

रामलाल का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

अब उसके दिल में एक ही अरमान था —

“अब मेरी बेटी मेरे साथ रहेगी… और हम दोनों चैन से जिंदगी बिताएँगे…”

बाप अकेला बैठा हुआ टूटा हुआ

लेकिन…

किस्मत ने कुछ और ही लिखा था।

एक दिन…

पूजा ने कहा —

“पापा… मेरी शादी शहर में तय हो गई है…”

रामलाल खुश हुआ —

“अच्छी बात है बेटी…”

लेकिन…

धीरे-धीरे…

उसकी बातें बदलने लगीं।

फोन कम होने लगे…

मुलाकातें खत्म हो गईं…

एक दिन…

रामलाल शहर गया…

अपनी बेटी से मिलने।

दरवाज़ा खुला…

लेकिन सामने जो था…

वो उसकी बेटी नहीं थी…

वो एक अजनबी थी।

“आप यहाँ क्यों आए हैं…?” उसने ठंडी आवाज में पूछा।

रामलाल के हाथ कांप गए —

“बेटी… मैं हूँ… तुम्हारा बाप…”

वो चुप रही…

फिर बोली —

“अब मेरी अपनी जिंदगी है… आप गाँव में ही ठीक हैं…”

उस एक लाइन ने…

रामलाल के सारे अरमान तोड़ दिए।

जिसे उसने उड़ना सिखाया था…

वही उसे पीछे छोड़ गई।

उस दिन…

रामलाल घर लौटा…

खाली हाथ…

और खाली दिल के साथ।

अब वो रोज दरवाजे पर बैठता है…

और बस एक ही बात सोचता है —

“क्या गलती थी मेरी…?”

“मैंने उसे ज्यादा प्यार दिया… या ज्यादा आज़ादी…?”

और सबसे बड़ा सवाल…

👉 क्या सच में कुछ सपने पूरे होकर भी इंसान को अकेला कर देते हैं…?

लेखक: Ayesha
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