शिवा… जो जन्म से ही अकेला था
कहते हैं… कुछ बच्चों की किस्मत जन्म से पहले ही लिख दी जाती है…
शिवा उन्हीं में से एक था।
जब वो अपनी माँ के कोख में था…
तभी एक दिन…
उसके पिताजी काम से घर लौट रहे थे…
लेकिन रास्ते में…
एक भयानक कार एक्सीडेंट हुआ…
और उसी दिन…
शिवा के जन्म से पहले ही…
उसका सहारा खत्म हो गया।
माँ ने उस दिन बहुत रोया…
लेकिन फिर भी अपने पेट पर हाथ रखकर कहा —
“अब तू ही मेरा सब कुछ है…”
कुछ महीनों बाद…
शिवा इस दुनिया में आया…
लेकिन…
उसके जन्म की खुशी में…
एक कमी हमेशा रही —
उसके पापा नहीं थे।
माँ ने उसे बहुत प्यार से पाला…
कभी उसे ये एहसास नहीं होने दिया कि वो अकेला है।
वो उसे सीने से लगाकर कहती —
“तू ही मेरा जीने का कारण है…”
शिवा धीरे-धीरे बड़ा होने लगा…
लेकिन…
किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था।
शिवा अभी सिर्फ 1 साल का ही था…
जब एक दिन उसकी माँ अचानक बीमार पड़ गई।
गरीबी… इलाज की कमी…
और कुछ ही दिनों में…
वो भी उसे छोड़कर चली गई।
उस दिन…
एक साल का छोटा सा बच्चा…
इस दुनिया में पूरी तरह अकेला हो गया।
ना माँ… ना बाप…
ना कोई अपना…
बस एक नाम —
“शिवा…”
गाँव वालों ने कुछ दिन तक उसे संभाला…
लेकिन…
कोई भी हमेशा के लिए किसी का नहीं होता।
शिवा बड़ा हुआ…
लेकिन…
हर त्योहार… हर खुशी…
उसके लिए बस एक सवाल बनकर रह गया —
“मेरे माँ-बाप कहाँ हैं…?”
एक दिन…
वो आसमान की तरफ देख रहा था…
और धीरे से बोला —
“अगर आप सच में हो ऊपर… तो एक बार मुझे भी अपने पास बुला लो…”
क्योंकि…
कुछ लोग…
जन्म लेते ही…
अकेले हो जाते हैं।