मैं भी इंसान हूँ… - सविता जैसे kai लडकियों की ये हालत है!
गाँव के एक छोटे से घर में…
सविता नाम की एक लड़की रहती थी।
वो बाकी लड़कियों जैसी ही थी…
लेकिन…
लोगों की नज़रों में अलग थी।
उसका रंग साँवला था…
और बस इसी वजह से…
लोग उसे ताने देते थे।
“काली है…” “इसका क्या होगा…?” “कोई इसे अपनाएगा नहीं…”
हर दिन… हर जगह…
सविता ये सब सुनती थी।
बाहर से वो चुप रहती…
लेकिन अंदर से…
हर शब्द उसे तोड़ देता था।
एक दिन…
वो आईने के सामने खड़ी थी…
और खुद से पूछ बैठी —
“क्या मैं सच में इतनी बुरी हूँ…?”
“क्या मैं इंसान नहीं हूँ…?”
उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे…
लेकिन उस दिन…
कुछ बदल गया।
उसने आँसू पोंछे…
और खुद से कहा —
“अगर दुनिया मुझे मेरे रंग से पहचानेगी… तो मैं उन्हें अपने काम से जवाब दूँगी…”
उस दिन के बाद…
सविता ने खुद को बदलना शुरू किया।
दिन-रात पढ़ाई…
मेहनत…
और सिर्फ एक लक्ष्य —
“खुद को साबित करना…”
साल गुजर गए…
और एक दिन…
पूरा गाँव हैरान था।
सविता अब एक बड़ी अफसर बन चुकी थी।
वही लोग…
जो कभी उसे ताने देते थे…
आज उसके सामने सिर झुका रहे थे।
सविता ने सिर्फ इतना कहा —
“रंग नहीं… इंसान की पहचान उसके कर्म से होती है…”
उस दिन…
सिर्फ सविता नहीं जीती…
हर वो इंसान जीता…
जिसे कभी उसके रंग, रूप या हालात के लिए नीचा दिखाया गया था।