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रोशनी मिली… लेकिन ज़िंदगी छिन गई

Ayesha 02 Apr, 2026 87 Views
गांव की गरीब मां और अंधा बेटा

बिहार के नालंदा जिले के एक छोटे से गांव में…

एक माँ अपने बेटे के साथ रहती थी।

उसका बेटा बचपन से ही अंधा था…

ना उसने कभी अपनी माँ का चेहरा देखा…

ना इस खूबसूरत दुनिया को।

माँ दिन-रात मेहनत करती…

लेकिन हर रात एक ही दुआ मांगती —

“भगवान… मेरे बेटे को एक बार ये दुनिया दिखा दे…”

समय बीतता गया…

बेटा 19 साल का हो गया…

लेकिन उसकी आँखों में अंधेरा वैसा ही था।

एक दिन…

माँ ने फैसला लिया —

“मैं अपनी जमीन बेच दूँगी… लेकिन अपने बेटे की आँखों का इलाज जरूर कराऊँगी…”

लोगों ने रोका…

“तू पागल हो गई है…? कल क्या खाएगी…?”

माँ ने बस इतना कहा —

“मेरा बेटा देख पाएगा… यही मेरे लिए सबसे बड़ी दौलत है…”

जमीन बिक गई…

इलाज हुआ…

और कुछ समय बाद…

वो दिन भी आया…

जब पहली बार…

उसने अपनी माँ को देखा।

उसकी आँखों में आँसू थे…

“माँ… तुम इतनी सुंदर हो…”

माँ रो पड़ी…

उस दिन…

उनकी जिंदगी में पहली बार रोशनी आई।

मेला का दृश्य, लड़का खुश होकर घूमता हुआ

कुछ दिनों बाद…

गाँव में मेला लगा।

बेटा बोला —

“माँ… मैं मेला देखने जाऊँ…?”

माँ मुस्कुराई —

“जा बेटा… अब तू दुनिया देख सकता है…”

वो बहुत खुश था…

हर चीज उसे नई लग रही थी…

रंग-बिरंगी लाइट…

लोग…

खुशियाँ…

सब कुछ।

लेकिन…

शाम होते-होते…

अंधेरा बढ़ने लगा।

उसकी आँखें अभी नई थीं…

रात में उसे साफ दिखाई नहीं दे रहा था।

घर लौटते वक्त…

अचानक…

वो एक लड़के से टकरा गया।

“अंधा है क्या…?”

उस लड़के ने गुस्से में कहा।

वो घबराया हुआ बोला —

“भाई… अभी मेरी आँख का ऑपरेशन हुआ है… मुझे ठीक से दिख नहीं रहा…”

लेकिन…

उस लड़के को गुस्सा आ गया।

बात बढ़ गई…

और गुस्से में…

उसने चाकू निकाल लिया।

अंधेरे में घायल लड़का जमीन पर गिरा हुआ

कुछ ही सेकंड में…

सब खत्म हो गया।

जिस लड़के ने अभी-अभी दुनिया देखनी शुरू की थी…

वो उसी दुनिया से चला गया।

गाँव में खबर पहुँची…

माँ दौड़ती हुई आई…

और अपने बेटे को खून में लथपथ देखा।

“उठ जा बेटा… तूने तो अभी दुनिया देखनी शुरू की थी…”

वो चिल्ला रही थी…

लेकिन…

अब सुनने वाला कोई नहीं था।

जिस रोशनी के लिए माँ ने सब कुछ खो दिया…

वही रोशनी…

उससे उसका बेटा छीनकर ले गई।

और अब सवाल ये है —

👉 क्या सच में गलती उस लड़के की थी…?

👉 या फिर…

हमारा गुस्सा इतना बड़ा हो गया है कि हम इंसानियत भूल चुके हैं…?

लेखक: Ayesha
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