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समय बदल गया… या हम बदल गए?

Ayesha 30 Mar, 2026 143 Views
गांव की चौपाल में बुजुर्ग और युवा बैठे हुए

“पहले जैसा कुछ नहीं रहा…” गाँव के बुजुर्ग रामू काका चौपाल पर बैठे हुए बोले।

शाम का समय था…

कुछ नौजवान मोबाइल में वीडियो देख रहे थे…

और कुछ बस यूं ही बैठे थे।

एक लड़का हँसते हुए बोला —

“काका… हर पीढ़ी यही कहती है…”

रामू काका ने उसकी तरफ देखा…

“नहीं बेटा… हमारे समय में फर्क था…”

“पहले लोग गरीब थे… लेकिन दिल बहुत अमीर था…”

“आज लोग पैसे में अमीर हैं… लेकिन दिल से गरीब हो गए हैं…”

पहले…

अगर किसी के घर दुख आता…

तो पूरा गाँव खड़ा हो जाता।

किसी किसान की फसल खराब हो जाती…

तो पड़ोसी बिना पूछे मदद कर देते।

किसी की बेटी की शादी होती…

तो पूरा गाँव जिम्मेदारी लेता।

लेकिन आज…

लोग वीडियो बनाते हैं…

मदद नहीं करते।

लोग घटना का वीडियो बनाते हुए मदद नहीं कर रहे

रामू काका की आवाज भारी हो गई —

“आज इंसान दर्द देखता है… लेकिन महसूस नहीं करता…”

एक लड़का बोला —

“लेकिन काका… आज सब कुछ advance हो गया है…”

काका हल्का सा मुस्कुराए —

“हाँ बेटा… तकनीक आगे बढ़ गई…”

“लेकिन इंसानियत पीछे छूट गई…”

“आज किसान भी परेशान है…”

“महंगाई बढ़ती जा रही है…”

“लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है…”

उन्होंने दूर खेत की तरफ देखा…

“पहले किसान थकता था… तो पड़ोसी उसका सहारा बनता था…”

“आज किसान टूट जाता है… और कोई देखने वाला नहीं…”

किसान खेत में अकेला परेशान बैठा हुआ

चौपाल पर सन्नाटा छा गया…

सबके चेहरे गंभीर हो गए।

फिर रामू काका ने धीरे से कहा —

👉 “समस्या सिर्फ सरकार नहीं है…”

👉 “समस्या ये है कि हम इंसान रहना भूल गए हैं…”

“पहले लोग कहते थे — तेरा दर्द मेरा है…”

“आज लोग कहते हैं — मुझे क्या…”

“जब तक इंसान खुद नहीं बदलेगा… कोई समय नहीं बदलेगा…”

और अब सवाल ये है —

👉 क्या सच में समय खराब हो गया है…?

👉 या फिर… हम ही अच्छे इंसान रहना भूल गए हैं…?

लेखक: Ayesha
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