पापा, आप थक गए हो ना…?
शाम का समय था… दरवाज़ा धीरे से खुला।
“आ गए पापा…?” छोटी सी आवाज आई।
राहुल ने दरवाज़े की तरफ देखा… उसका 8 साल का बेटा खड़ा था।
“हाँ बेटा…” उसने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा।
उसके चेहरे पर थकान साफ दिख रही थी… कपड़े धूल से भरे थे… और आँखों में नींद।
“पापा, आज फिर देर हो गई…” बेटे ने मासूमियत से पूछा।
“काम ज्यादा था…” राहुल ने जूते उतारते हुए कहा।
“आप थक गए हो ना…?”
राहुल कुछ सेकंड चुप रहा… फिर बोला — “नहीं बेटा… मैं ठीक हूँ…”
लेकिन सच ये था… वो बहुत थक चुका था।
रात को दोनों साथ बैठे खाना खा रहे थे।
“पापा, आप रोज इतना काम क्यों करते हो?”
राहुल ने मुस्कुराकर कहा — “ताकि तुम जो चाहो, वो कर सको…”
“मुझे कुछ नहीं चाहिए…” बेटे ने धीरे से कहा।
“बस आप जल्दी घर आ जाया करो…”
ये सुनकर राहुल के हाथ रुक गए।
उसने पहली बार अपने बेटे की आँखों में देखा… वहाँ कोई खिलौने की चाह नहीं थी… बस अपने पापा की जरूरत थी।
“पापा… आप मेरे साथ खेलोगे?”
राहुल ने थकान के बावजूद मुस्कुराकर कहा — “हाँ… जरूर…”
और वो दोनों हँसने लगे…
शायद कई दिनों बाद राहुल सच में मुस्कुराया था।
रात को सोने से पहले…
बेटा राहुल के पास आया और उसे गले लगा लिया।
“पापा…”
“हम्म…?”
“आप सबसे अच्छे हो…”
राहुल की आँखें भर आईं…
उसने अपने बेटे को कसकर गले लगा लिया।
“और तुम… मेरी ताकत हो…”
उस रात… राहुल की सारी थकान खत्म हो गई।
क्योंकि उसे समझ आ गया —
दुनिया की सबसे बड़ी खुशी… अपने बच्चे की एक छोटी सी मुस्कान होती है।