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गरीब लड़के की किस्मत

Ayesha 10 Mar, 2026 55 Views
लकङी का टेहेनीया

बहुत समय पहले एक छोटे से गाँव में एक गरीब लड़का रहता था। उसका नाम मोहन था। मोहन के माता-पिता बहुत गरीब थे। उसके पिता मजदूरी करते थे और उसकी माँ लोगों के घरों में काम करती थी। घर की हालत इतनी खराब थी कि कई बार उन्हें एक समय का खाना भी मुश्किल से मिलता था।

लेकिन मोहन बहुत मेहनती और समझदार लड़का था। वह हमेशा सोचता था कि एक दिन वह अपने माता-पिता की गरीबी जरूर दूर करेगा। वह गाँव के स्कूल में पढ़ता था और पढ़ाई में बहुत तेज था।

एक दिन स्कूल से लौटते समय मोहन को रास्ते में एक बूढ़ा आदमी मिला। बूढ़ा आदमी बहुत थका हुआ था और उसे चलने में परेशानी हो रही थी। मोहन तुरंत उसके पास गया और बोला, “बाबा, क्या मैं आपकी मदद कर सकता हूँ?”

बूढ़े आदमी ने मुस्कुराकर कहा, “बेटा, अगर तुम मुझे उस पेड़ के नीचे तक पहुँचा दो तो बहुत अच्छा होगा।”

मोहन ने बिना कुछ सोचे बूढ़े आदमी को सहारा दिया और उसे पेड़ के नीचे बैठा दिया। फिर उसने अपने बैग से थोड़ा सा खाना निकाला और बाबा को दे दिया।

बूढ़ा आदमी बहुत खुश हुआ। उसने कहा, “बेटा, तुम बहुत अच्छे दिल के हो। आज के समय में लोग किसी की मदद करना भूल गए हैं।”

बुढा से रोटी लेते हुए लङका

इतना कहकर बूढ़े आदमी ने मोहन को एक छोटा सा सिक्का दिया और कहा, “यह कोई साधारण सिक्का नहीं है। इसे संभालकर रखना। जब भी तुम सच्चे दिल से मेहनत करोगे, यह तुम्हारी किस्मत बदल देगा।”

मोहन ने उस सिक्के को अपने पास रख लिया। उसने सोचा कि शायद यह एक आशीर्वाद है। अगले दिन से वह और भी मेहनत से पढ़ाई करने लगा।

समय बीतता गया। मोहन ने पढ़ाई में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। उसने शहर जाकर पढ़ाई करने का फैसला किया। गाँव के लोगों ने भी उसकी मदद की।

कई सालों की मेहनत के बाद मोहन एक बड़ा अधिकारी बन गया। अब उसके पास अच्छा घर था, सम्मान था और पैसा भी था।

लेकिन मोहन कभी अपनी गरीबी और संघर्ष को नहीं भूला। उसने अपने गाँव में एक बड़ा स्कूल बनवाया ताकि कोई भी गरीब बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे।

एक दिन वही बूढ़ा आदमी फिर से मोहन के सामने आया। मोहन तुरंत उसे पहचान गया।

गाँव वाले खुश

बूढ़ा आदमी मुस्कुराकर बोला, “देखा बेटा, मैंने कहा था ना कि मेहनत और अच्छे दिल से किस्मत बदल जाती है।”

मोहन ने सम्मान से उनका आशीर्वाद लिया और कहा, “बाबा, अगर उस दिन आप मुझे प्रेरणा नहीं देते तो शायद मैं यहाँ तक नहीं पहुँच पाता।”

उस दिन मोहन को समझ आ गया कि असली किस्मत सिक्के में नहीं बल्कि इंसान की मेहनत और अच्छे दिल में होती है।

तभी से गाँव के लोग मोहन की कहानी सुनाकर अपने बच्चों को सिखाते हैं — मेहनत और अच्छाई कभी बेकार नहीं जाती, एक दिन किस्मत जरूर बदलती है।

लेखक: Ayesha
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