भाई… तूने ही मुझे मार दिया
“अबे तू मर गया ना… तो मैं भी नहीं जिऊँगा…” रोहित हँसते हुए बोला।
समीर ने कंधे पर हाथ रखा — “पागल है क्या… हम दोनों एक साथ जिएंगे… एक साथ मरेंगे…”
दोस्ती ऐसी थी… कि गाँव में लोग कसम खाते थे इनके नाम की।
“ये दोनों कभी अलग नहीं होंगे…”
लेकिन… किस्मत कुछ और लिख चुकी थी।
रात के 11 बजे…
“तुम ऐसा क्यों कर रहे हो…?” रोहित की बहन ने धीरे से पूछा।
समीर बोला — “क्योंकि… मैं तुमसे प्यार करता हूँ…”
“लेकिन वो मेरा भाई है…”
“और वो मेरा दोस्त…” समीर की आवाज काँप गई।
दोनों चुप हो गए…
उन्हें पता था — अगर ये बात बाहर आई… तो सब खत्म हो जाएगा।
अगले दिन…
“चल खेत चलते हैं… बात करनी है…” रोहित ने शांत आवाज में कहा।
समीर ने सिर हिलाया — “ठीक है भाई…”
शाम का समय था… सूरज डूब रहा था…
दोनों चुप थे…
कुछ दूर चलने के बाद… रोहित रुक गया।
“एक बात पूछूँ…?”
“हाँ…”
“तूने मेरी ही बहन को क्यों चुना…?”
समीर की आँखों में आँसू आ गए —
“क्योंकि… मैं उसे सच में चाहता हूँ… लेकिन तुझे खोना नहीं चाहता था…”
रोहित हँस पड़ा… लेकिन वो हँसी बहुत दर्द भरी थी।
“दोनों नहीं बचते भाई…”
“या तो दोस्ती… या मोहब्बत…”
कुछ पल सन्नाटा रहा…
और फिर…
उस शाम… दोस्ती हार गई।
गाँव में अगले दिन खबर फैली —
“दो दोस्तों में झगड़ा हुआ… और एक की जान चली गई…”
लोग आज भी कहते हैं —
“वो मरने से पहले बस एक ही बात बोल रहा था…”
👉 “भाई… तूने ही मुझे मार दिया…”