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अनोखी दोस्ती राजा की

Ayesha 10 Mar, 2026 113 Views
राजा से दोस्ती

बहुत समय पहले की बात है। एक बड़े और समृद्ध राज्य में राजा विक्रम का शासन था। राजा बहुत न्यायप्रिय और दयालु था। उसके राज्य में किसी चीज़ की कमी नहीं थी। महल सोने और चांदी से सजा हुआ था, सैनिकों की बड़ी सेना थी और हर तरफ खुशहाली थी। लेकिन इन सबके बावजूद राजा के दिल में एक खालीपन था। उसके पास सब कुछ था लेकिन एक सच्चा दोस्त नहीं था।

एक दिन राजा ने सोचा कि वह साधारण कपड़े पहनकर अपने राज्य की स्थिति देखने जाएगा। इसलिए वह बिना किसी को बताए महल से निकल पड़ा। चलते-चलते वह एक छोटे से गाँव में पहुँचा। वहाँ उसने देखा कि एक गरीब आदमी पेड़ के नीचे बैठा सूखी रोटी खा रहा था, लेकिन उसके चेहरे पर अजीब सी खुशी थी।

मुस्कुराते गरीब

राजा ने उसके पास जाकर पूछा, “भाई, तुम्हारे पास तो ज्यादा कुछ नहीं है, फिर भी तुम इतने खुश कैसे हो?”

गरीब आदमी मुस्कुराया और बोला, “खुशी पैसे से नहीं मिलती। मेरे पास मेहनत करने वाले हाथ हैं, सच्चाई है और भगवान का भरोसा है, यही मेरे लिए सबसे बड़ी दौलत है।”

राजा उसकी बात सुनकर बहुत प्रभावित हुआ। उसने उस गरीब आदमी का नाम पूछा। उसका नाम रामू था। राजा ने रामू से बहुत देर तक बातें कीं और दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई।

कुछ दिनों बाद राजा ने रामू को महल में बुलाया। जब रामू महल पहुँचा और उसे पता चला कि उसका नया दोस्त ही असल में राजा है, तो वह घबरा गया। लेकिन राजा ने मुस्कुराकर कहा, “डरो मत, तुम मेरे दोस्त हो और दोस्ती में अमीरी-गरीबी नहीं देखी जाती।”

मोजा करते हुए

धीरे-धीरे पूरे राज्य में यह बात फैल गई कि राजा एक गरीब आदमी को अपना दोस्त मानता है। कुछ मंत्री और दरबारी इससे खुश नहीं थे। उन्हें लगा कि एक गरीब आदमी राजा का दोस्त कैसे हो सकता है।

एक दिन मंत्रियों ने राजा से कहा, “महाराज, यह आपकी शान के खिलाफ है। एक गरीब आदमी को अपना दोस्त बनाना उचित नहीं है।”

राजा ने मुस्कुराकर जवाब दिया, “सच्ची दोस्ती दिल से होती है, धन से नहीं। जिसके दिल में सच्चाई और अच्छाई हो, वही असली दोस्त होता है।”

समय बीतता गया। एक बार राज्य में भयंकर सूखा पड़ गया। फसलें खराब हो गईं और लोगों को खाने की परेशानी होने लगी। राजा बहुत चिंतित था।

तभी रामू ने राजा को सलाह दी, “महाराज, अगर हम सभी गाँवों में मिलकर कुएँ और तालाब बनवाएँ, तो आने वाले समय में पानी की कमी नहीं होगी।”

राजा को यह सलाह बहुत अच्छी लगी। उसने तुरंत पूरे राज्य में कुएँ और तालाब बनवाने का आदेश दे दिया। कुछ ही महीनों में पूरे राज्य में पानी की समस्या खत्म हो गई। लोगों की जिंदगी फिर से खुशहाल हो गई।

राजा ने सबके सामने कहा, “आज अगर मेरा राज्य सुरक्षित है तो इसका श्रेय मेरे दोस्त रामू को जाता है।”

उस दिन से लोगों को समझ आ गया कि असली महानता धन या पद में नहीं होती, बल्कि अच्छे दिल और सच्ची सोच में होती है।

इस तरह राजा और गरीब आदमी की यह अनोखी दोस्ती पूरे राज्य में मिसाल बन गई। लोग आज भी कहते हैं — सच्ची दोस्ती में अमीरी-गरीबी नहीं देखी जाती, बस दिल की सच्चाई देखी जाती है।

लेखक: Ayesha
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